वीर सावरकरजी की सबसे बढ़िया और दिल को छू लेने वाली मराठी कविता जयोस्तुते का हिंदी अनुवाद करने का ये प्रयास. सारे मूल अधिकार स्वर्गीय वीर सावरकरजी के पास रहें, उनको वन्दनस्वरूप मेरी तरफ से ये भेंट हमारे हिंदी वाचकों के लिए.

।।जयोस्तुते, जयोस्तुते श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे
 स्वतंत्रते भगवती त्वामहं यशोयुतां वंदे।।
 अर्थ: जय हो, जय हो जो सबसे मंगल, सबसे पवित्र जिसे माना,
 हे देवी स्वतंत्रता, तुमसे करे हम अपने विजय की प्रार्थना! 

 ।। राष्ट्राचे चैतन्य मूर्त तू, नीती संपदांची,
 स्वतंत्रते भगवती श्रीमती राज्ञी तू त्यांची;
 परवशतेच्या नभात तूचि आकाशी होशी,
 स्वतंत्रते भगवती चांदणी चमचम लखलखशी।। 

 अर्थ:
 राष्ट्र की आत्मा हो तुम, स्वतंत्रते तुम ही हो देश की आन और संपदा की रानी,
 गहरे अंधियारे में जो आसमान में दिखाई दे चमकता सितारा;
 कुछ इसी तरह तुम भी हो जीने का एक मात्र सहारा! 

।।गालावरच्या कुसुमी किंवा कुसुमांच्या गाली,
 स्वतंत्रते भगवती तूच जी विलसतसे लाली;
 तू सूर्याचे तेज, उदधिचे गांभिर्यही तूचि,
 स्वतंत्रते भगवती अन्यता ग्रहण नष्टतेची।।

 अर्थ: 
गालों पर खिले फूलों पर या फूलों पर खिली लाली पर,
 एक तुम ही तुम हो संसार की हर खुशहाली पर;
 तुम हो सूरज का तेज, तुम हो समंदर की गहराई,
 है देवी स्वतंत्रता, ये ग्रहण नष्ट होने की आस तुमसे ही तो है आई! 

 ।।मोक्षमुक्ती ही तुझीच रूपे तुलाच वेदांती,
 स्वतंत्रते भगवती योगीजन, परब्रम्ह वदती;
 जे जे उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर‌ ते ते,
 स्वतंत्रते भगवती सर्व तव सहचारी होते।।

 अर्थ: 
तुम हो वेदों का सार, तुम्ही से है प्राप्त मोक्ष,
 हे देवी स्वतंत्रते, तुम्हे भजे है योगी एवं परब्रम्ह प्रत्यक्ष;
 जो भी है संसार का सबसे उत्तम, सबसे उन्नत
 सबसे मधुर,
 सारे ही है तुम्हारे सहचर, तुम ही हो सम्पन्न सुदूर।।

 ।।हे अधम रक्तरंजिते, सृजनपूजिते;
 श्री स्वतंत्रते, श्री स्वतंत्रते, श्री स्वतंत्रते!
 तुजसाठी मरण ते जनन,
 तुजविण जनन ते मरण!
 तुज सकल चराचर शरण, चराचर शरण!

 श्री स्वतंत्रते, श्री स्वतंत्रते, श्री स्वतंत्रते।।
 अर्थ:
 हे दुर्जनों के खून से रंगी देवी स्वतंत्रते,
 हे सज्जनों की पूजनीय देवी स्वतंत्रते;
 तुम्हारे लिए मरना तो जीने से है बेहतर,
 तुम्हारे बिन जीना तो मरने से भी बदतर!
 हे देवी स्वतंत्रते, तुम्हारी शरण मे सारे ही चर – अचर!!
 हे देवी स्वतंत्रते तुम्हारे शरण मे सारे ही चर- अचर!!!

Warm Regards,

Dnyanesh Make “The DPM”

Categories: Poems

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