आजादी की 74 वी सालगिरह, स्वर्णिम वर्ष में प्रवेश और इतने लंबे सफर में आज भारत सिर्फ कहने को नहीं, सच मे दुनिया के कदम से कदम मिलाकर चल भी रहा है और एक ताकतवर देश के रूप में उभरा भी है. पूर्ण विश्वास से हम सब कह सकते है कि आनेवाले समय में हम भारत को एक महासत्ता बनाएंगे. भारत विश्वगुरु बनेगा. हां हममें लाख कमियाँ होंगी, हां हमने कईं सारी मुसीबतों से जूझना है लेकिन हम वो जरूर करेंगे. इन सब सफलताओं को हासिल करने में और आगे का रास्ता मुकम्मल करने में एक चीज का होना बहुत जरूरी है, और वो है राष्ट्रीय चरित्र, अंग्रेजी में कहा जाए तो नॅशनल कैरेक्टर!

नॅशनल कैरेक्टर क्या होता है?

किसी भी देश के लोगों को उनकी विविधताओं और विभिन्नताओं के बावजूद जो एक गुण, या फिर कोई सामाजिक आदत सकारात्मकता से व्यक्त कर दे वो है नॅशनल कैरेक्टर. यही एक गुण दिखने में कितना ही सामान्य क्यों न हो पर देश के आर्थिक विकास से लेकर युद्ध में देश की जीत तक सब कुछ बना सकता है.

राष्ट्रीय चरित्र का सर्वोत्तम उदाहरण

उदाहरण के लिये समझो, की जापान में आपको कोई भी भीड़ में लाइनें तोड़ता हुआ नहीं दिखाई देगा. चाहे जितनी भीड़ हो लेकिन वो लोग हमेशा लाइन से चलते है, सीढियां चढ़ते वक्त हमेशा दाईं ओर से आनेवाले लोगों के लिए जगह छोड़ते है फिर दाईं ओर से कोई आये या न आये. काम के प्रति जापानी लोग बड़े ही उत्साही होते है. लगातार 18 घंटो तक काम करना उनके लिए आम बात है. कहा जाता है कि किसी जापानी जूते की फैक्ट्री में मजदूरों ने हड़ताल की. हड़ताल में साधारण तौर से काम बन्द होता है, लेकिन उन्होंने काम किया. जब तक उनकी मांगे मंजूर नहीं हुई तब तक सारे मजदूर सिर्फ एक पैर का जूता बनाते रहे. सामुराई जैसी सामंत व्यवस्था को जापानी लोगों ने देखते ही देखते खत्म किया और आज एक सफल लोकतंत्र के रूप में जापान दुनिया के सामने है. इन्ही सब आदतों का परिणाम है कि 2011 की भीषण सुनामी और भूकंप के बाद सिर्फ एक साल में जापान अपने नुकसान से उभर गया. यही वजह है कि परमाणु हथियार गिरके जो शहर खाक हो चुके थे, वही हिरोशिमा और नागासाकी आज फिरसे जापान के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है. दुनिया का सबसे तेज रेल नेटवर्क हो या दुनिया की सबसे तेज कारें, सब जापान से ही बनता है. छोटासा जापान, क्षेत्रफल और जनसंख्या में लगभग हमारे महाराष्ट्र जितना होगा लेकिन आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. जी हाँ, जीडीपी नॉमिनल में जापान भारत से दो पायदान आगे है. देश का राष्ट्रीय चरित्र इस कदर देश को आगे ले जा सकता है.

क्या भारत का कोई नॅशनल कैरेक्टर है?

बिल्कुल है. बस हम उसे पहचान नहीं पाते. विविधताओं में एकता हमारे देश की खूबसूरती है, और यही हमारा नॅशनल कैरेक्टर भी है. बस सवाल ये है कि हमारी एकता के मायने क्या है? हिन्दू एकता? मुस्लिम उम्मा? द्रविड़ नाडु?

ऐसी बँटी हुई एकात्मता से देश आगे कैसे निकलेगा? हमे कुछ प्रमुख मुद्दों पर अपने मतभेद भूलकर एक होना पड़ेगा, तभी हमारी एकात्मता सार्थ है. हमारा पिछड़ापन ही ये है कि चाहे धर्मनिरपेक्षता का पाठ 70 सालों से रटवाकर सत्ता में रहनेवाली पार्टी हो या फिर हिन्दू एकता का नारा देकर सत्ता में आनेवाली पार्टी हो, हम अपने मुद्दों को सही से पहचान नहीं पाते. बिल्कुल ही सच है कि हमारे देश मे कईं और पाकिस्तान पनप रहे है और ये भी सच है कि शायद देश एक बहुत ही कड़वी पूँजीवादी परंपरा की ओर बढ़ रहा है जहाँ दो चार बड़े उद्योजक देश की संपत्ति का कंट्रोल हाथ मे ले लेंगे. ये भी सच है कि देश पर पर्यावरण का गंभीर खतरा है और ये भी सच है कि देश में एक बड़ा धार्मिक गृहयुद्ध हो सकता है. पूरा सच तो ये है कि दुनिया के बडे बडे देश कभी चाहते ही नहीं कि भारत उनसे आगे निकल जाए और इसीलिए वो हर वो प्रयास करते है जिससे भारत पिछड़ा रहे. लेकिन भारत फिर भी आगे निकल जाता है और फिर उन्ही बड़े देशों की जरूरत बन जाता है. बस यही पहचानना है हमें, की हममें जो भी मनमुटाव बनते है उनमें जरूर किसी बाहरी ताकद का हाथ होता है, कभी अमरीका तो कभी चाइना! लेकिन भारत का सार्वभौम, भारत की अंदरूनी सुरक्षा, भारत की सेना, भारत की प्राचीन हिन्दू-बौद्ध-जैन-सिख संस्कृतियां और भारत की कानून व्यवस्था इन सबमे हमे अपने मतभेद भूलकर हर बार एक होना है. देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड हो या जनसंख्या नियंत्रण कानून, धारा 370 कश्मीर से हटना हो या चीनी उपकरणों पर पाबंदी हर मामले पर इस एकता का असर दिखता है और दुनिया इस एकता के सामने झुकती है.

कैसे बनेगा नॅशनल कैरेक्टर?

ऊपर लिखी बड़ी-बड़ी बातें तो फिर भी धीरे-धीरे मुकम्मल होंगी, लेकिन कुछ चीजें है जो हम अभी बदल सकते है और हमे तुरंत प्रभाव से करनी चाहिए. देश मे अभी सबसे बड़ा संकट पर्यावरण का है, सब मिलकर उजड़े पहाड़ों पर पेड़ भी लगाने लग गए तो भी बारिश का पानी जमीन सोख लेगी और देश का भविष्य में रेगिस्तान बनना टल जाएगा. क्या ट्रेनों में चढ़ते वक्त लाइन से खड़े रहने में हमे अलग से बदलाव की जरूरत है? ये तो हम आज से ही कर सकते है! क्या रास्ते पर, फुटपाथ पर या किसी भी सार्वजनिक जगह पर गंदगी फैलाना हम अभीभी बंद नहीं कर सकते? कितना कष्ट लगेगा अपनी अपनी पानी की बोतलें पहाड़ों से उठाकर घर लाने में या उसे सही तरह से डिस्पोज करने में? क्या नदियों की स्वच्छता हमारा जिम्मा नहीं? हम ये सब चीजें कर सकते है और बतादूँ की हम धीरे धीरे इसमें बढ़ोतरी भी कर रहे है, बस एक दिशा की जरूरत है.

इतिहास के पन्नो से मिसालें

वानरसेना ने बनाये हुए रामसेतु से लेकर 1857 के राष्ट्रीय उठाव तक हमारे इतिहास के पन्ने हमारे पूर्वजों के नॅशनल कैरेक्टर की गवाही देते है. ब्रिटिश अधिकारी मैकॉले ने जब भारत का पूरा भ्रमण किया तो उसने अपनी रिपोर्ट में लिखते हुए कहा था कि ये लोग अपनी परंपरा के, अपने वचन के और अपने उसूलों के पक्के है. इनकी शिक्षा व्यवस्था बहुत ही ताक़दवर है और इनको आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता. ये बात 19 वी सदी की है. अंग्रेजो ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को अच्छेसे तोड़ दिया, हम टूट गए और हमपर जुलुम हुए. यही सीखना है कि भगवान राम के जमाने से ज्ञान साधना हमारा नॅशनल कैरेक्टर है, हमे अपनी शिक्षा व्यवस्था को फिर से बेहतर बनाना है. चंद्रगुप्त मौर्य के जमाने से हमारा नॅशनल कैरेक्टर शौर्य का है, हमे अपना शौर्य मरने नहीं देना है. महाभारत के समय से हमारा चरित्र “अहिंसा परमो धर्म, धर्महिंसा तदैव च” कहते हुए अन्याय के खिलाफ हथियार तानने वाला ही है! राजपूतों से लेकर मराठो तक, सिखों से लेकर द्रविड़ों तक हर समाज ने देश के इतिहास में योगदान दिया है और आज भी हमे वहीं करना है.

नॅशनल कैरेक्टर की सही परिभाषा!

देश लोगों से बनता है, और लोगों में भेद होना बहुत ही नैसर्गिक है. हाथ की पांच उंगलियाँ एक समान नहीं होती, देश के सब लोग एक जैसे, एक ही सोच के कैसे बन पाएंगे? हमारे नॅशनल कैरेक्टर का पहला उद्देश्य और सही से कहा जाए तो तरीका यही हो कि मेरा हिन्दू होना, किसीका मुसलमान होना, किसीका बुद्ध होना या फिर किसीका जैन होना देश से बढ़कर नहीं हो सकता. मेरा ब्राम्हण होना, मेरा मराठी होना, मेरा दक्षिणपंथी होना, या किसी और का क्षत्रिय होना, वामपंथी होना या द्रविड़ होना, सब अपनी अपनी मर्यादा तक ही सीमित होना चाहिए. किसी भी तरह से देश के अपने ही लोगों के प्रति हिंसक होना गलत है और उसके खिलाफ ही रहना पड़ेगा. देश अपनी गति से विकसित हो रहा है, होकर रहेगा लेकिन जब तक हम अपनी एकता को बनाएं रखते है, तब तक हमारा नॅशनल कैरेक्टर जीवित रहेगा और हमे आगे ले जाएगा. हमे इस विविधता में एकता के नॅशनल कैरेक्टर को सही से अपनाना चाहिए.

75 वे स्वतंत्रता दिवस की आप सबको मनःपूर्वक शुभकामनाएं!

जय हिंद, वंदे मातरम!

Warm Regards,

Dnyanesh Make “The DPM”


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