अवध_असम_एक्सप्रेस_एक_प्रेमकहानी!

अवध असम एक्सप्रेस – एक प्रेमकहानी!

अवध – असम एक्सप्रेस डिस्क्लेमर – यह एक सत्य घटना पर आधारित काल्पनिक प्रेमकथा है. इसके सभी मुख्य किरदार काल्पनिक है और इनका 2 अगस्त 1999 को हुई सत्य घटना से कोई भी संबंध नही है. कथा की रंजकता को बनाये रखने के लिए कृपया इस घटना के बारे में Read more…

image of गाज़ी शहरे इश्क़ के

गाज़ी शहरे इश्क़ के!

उसकी कोहनी से पकड़कर यूँ नजाकत से खींच लेता पास, तो पूछता, क्या है ज़्यादा खूबसूरत, उसकी आँखें या उनमें डूबने का खयाल? पलके झुकाकर जो वो बिना लफ़्ज़ों के कहदे बहुत कुछ; बता देता हूँ पूरी कायनात की औकात नहीं उन आँखों के झील में समाने की! कुछ गम Read more…

जयोस्तुते – हिंदी अनुवाद

वीर सावरकरजी की सबसे बढ़िया और दिल को छू लेने वाली मराठी कविता जयोस्तुते का हिंदी अनुवाद करने का ये प्रयास. सारे मूल अधिकार स्वर्गीय वीर सावरकरजी के पास रहें, उनको वन्दनस्वरूप मेरी तरफ से ये भेंट हमारे हिंदी वाचकों के लिए. ।।जयोस्तुते, जयोस्तुते श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती Read more…

कल बात करते है….

कल बात करते हैं! हर दिन तो इसी पे खतम होता है, की हम कल बात करते है… यू तो हम बाते करते नहीं है ज्यादा,पर हर बार कहते कि कल बात करते है…इतना परेशान होते हैं हम, की कर देते हैं कभी कभी अपनों को ही नजरअंदाज;दुसरो की परेशानी Read more…

नाक के नीचे से – अंतिम भाग! (भाग 3)

दरअसल अग्रवाल जी ने ये कहा, “देश के अंदर असल में तो ब्यूरोक्रेसी ही राज करती है, ये बात आप भी बखूबी जानते है. हम ब्यूरोक्रेट्स इन सारे नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे हैं और जनता की भलाई करना जानते भी है. इसीलिए लंबे अरसे से सिस्टीम के अंदर सिंडिकेट बनाये रखे लेकिन मजबूत सरकार के सामने हमारा कुछ नहीं चलता. ऐसेमें हमारी जिम्मेदारी बनती है की देश का लोकतंत्र बचाये”

आजोळ

दिवाळी निमित्त अमेय वेळात वेळ काढून कॅनडाहुन चार दिवस आलेला. एका मोठ्या आंतरराष्ट्रीय कम्पनीमध्ये CFO होऊन गलेलठ्ठ पगार उचलणारा, सदैव महागड्या गाड्यांमध्ये फिरणारा अमेय आज खुश वाटत नव्हता. त्याचं आजोळ हरवलं होतं. तसा तो आज सुवर्णा मावशीकडे थांबलेला मात्र आजोळच्या आठवणी आज डोळ्यातलं पाणी थांबू देत नव्हत्या.

दर्द

दर्द ये नहीं कि हम साथ नहीं है,

दर्द है आपकी आंखों में दर्द के ना होने का;

दर्द ये भी नहीं के हमने पाया नहीं आपको,

Lost Memories

Soothing cold temperatures of Pune City at a fine evening of January 2017 were having an extra romantic flavour today. This romanticism in the environment is the basic reason why the Queen of Deccan makes you fall in love with it. Harish was no longer an outsider for Pune, at least for himself.