जयोस्तुते – हिंदी अनुवाद

वीर सावरकरजी की सबसे बढ़िया और दिल को छू लेने वाली मराठी कविता जयोस्तुते का हिंदी अनुवाद करने का ये प्रयास. सारे मूल अधिकार स्वर्गीय वीर सावरकरजी के पास रहें, उनको वन्दनस्वरूप मेरी तरफ से ये भेंट हमारे हिंदी वाचकों के लिए. ।।जयोस्तुते, जयोस्तुते श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती Read more…

कल बात करते है….

कल बात करते हैं! हर दिन तो इसी पे खतम होता है, की हम कल बात करते है… यू तो हम बाते करते नहीं है ज्यादा,पर हर बार कहते कि कल बात करते है…इतना परेशान होते हैं हम, की कर देते हैं कभी कभी अपनों को ही नजरअंदाज;दुसरो की परेशानी Read more…

I exist, and I live!

A small beat of music, makes me repeat it againA little time alone, saves from mental drainA small flash of random memory takes me to a deep diveOtherwise I just exist, these moments I live! Oh my loved ones, I feel a lot for youEveryone’s a selfish but I choose Read more…

दर्द

दर्द ये नहीं कि हम साथ नहीं है,

दर्द है आपकी आंखों में दर्द के ना होने का;

दर्द ये भी नहीं के हमने पाया नहीं आपको,

चलो मान लिया..!

पता आपको भी है वादा किसने तोड़ा था,

हमसे बेवफाई कर किसी और से रिश्ता जोड़ा था…

कहें थे हम बताइये क्या हमसे अच्छा कोई है..?

जो है तो फिर जाइये खुशहाल, रहे खाली हमारा झोला,

पूरी आजादी के बावजूद भी आप ने झूठ बोला….

हम भी जान गए आपने रुखसत का है ठान लिया…;

कसम वालिदा की खाई आपने, चलो मान लिया…!

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हां मैं भी हूँ और मेरा अस्तित्व भी है..!

सालों साल सबसे अलग और अकेला रहता आया हूँ

दोस्तियाँ और मोहब्बतें बस दूर से देखता आया हूँ

अकेले ही अकेले चलते चलते गिरते संभलते बढ़ रहा हूँ

जो आज जमाना कैद हुआ तो धाएँ धाएँ रो रहा है

लगता है तन्हाइयों का मैंने पाया स्वामित्व है

हां मैं भी हूँ और मेरा अस्तित्व है!

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ये आज की बात तो नहीं है!

खुद ही चलकर, खुद ही गिरकर उठके फिर से चलना जो हमें आता है; लाख उठे तूफान फिर भी, दीये की तरह जलना जो हमें आता है; ये आज की तो बात नहीं है! रूह के कतरे मेरे बिखर बिखर कर जुड़े थे, सारे गम जाने कितने दिन खामोश पड़े Read more…

श्रृंगारिका

कहदो जो एक बार तुम बस पलके झुकाकर, तुम्हारी जुल्फों की छांव में एक पल बिता सकूँ; खामोश हो लब्ज, नजरें बयाँ करे, के तुम्हारी आँखों मे डूबकर मिलेगा सुकून..! के मेरी उँगलियाँ ले नाप तुम्हारे गालों पर, चढ़ती हुई उस लाली का; के मेरे सब्र का फल वही है, Read more…