अवध_असम_एक्सप्रेस_एक_प्रेमकहानी!

अवध असम एक्सप्रेस – एक प्रेमकहानी!

अवध – असम एक्सप्रेस डिस्क्लेमर – यह एक सत्य घटना पर आधारित काल्पनिक प्रेमकथा है. इसके सभी मुख्य किरदार काल्पनिक है और इनका 2 अगस्त 1999 को हुई सत्य घटना से कोई भी संबंध नही है. कथा की रंजकता को बनाये रखने के लिए कृपया इस घटना के बारे में Read more…

नाक के नीचे से – अंतिम भाग! (भाग 3)

दरअसल अग्रवाल जी ने ये कहा, “देश के अंदर असल में तो ब्यूरोक्रेसी ही राज करती है, ये बात आप भी बखूबी जानते है. हम ब्यूरोक्रेट्स इन सारे नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे हैं और जनता की भलाई करना जानते भी है. इसीलिए लंबे अरसे से सिस्टीम के अंदर सिंडिकेट बनाये रखे लेकिन मजबूत सरकार के सामने हमारा कुछ नहीं चलता. ऐसेमें हमारी जिम्मेदारी बनती है की देश का लोकतंत्र बचाये”

आजोळ

दिवाळी निमित्त अमेय वेळात वेळ काढून कॅनडाहुन चार दिवस आलेला. एका मोठ्या आंतरराष्ट्रीय कम्पनीमध्ये CFO होऊन गलेलठ्ठ पगार उचलणारा, सदैव महागड्या गाड्यांमध्ये फिरणारा अमेय आज खुश वाटत नव्हता. त्याचं आजोळ हरवलं होतं. तसा तो आज सुवर्णा मावशीकडे थांबलेला मात्र आजोळच्या आठवणी आज डोळ्यातलं पाणी थांबू देत नव्हत्या.

Lost Memories

Soothing cold temperatures of Pune City at a fine evening of January 2017 were having an extra romantic flavour today. This romanticism in the environment is the basic reason why the Queen of Deccan makes you fall in love with it. Harish was no longer an outsider for Pune, at least for himself.

Blind Love – Part 1

Despite of the heavy rains in the town, Aniruddh’s curiosity couldn’t let him stay in the house and he went to Django’s house.

Django used to live about half a mile from Ani’s house. Ani and Django weren’t friends. They barely knew each other. Django loved Ani’s Sister, Radhika. Django and Radhika were college mates and that’s how Django had a relationship with her.

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नाक के नीचे से: भाग 2

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे.

नाक के नीचे से – भाग 1

तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था.