Uncategorised
अमीरी
मुड़ी जो गाड़ी स्टेशन की ओरढूंढ रहे हम भाई एक छोरकी हमारी खुशियों का बचा निवालामिटाए भूख किसीकी जब तक हो भोर दिन था सुहाना खुशियों से भरापीली हल्दी लगी पहनाया चूड़ा भी हरावीरे की हल्दी में सौ लोग आएदुआएं दिए, खुश होकर, खाना भी खाएअपनी जिंदगी अपने अरमानों और Read more…

