जो किसीपर गोरे साहब अपनी औरतें लुटाने तक मेहरबान थे,

उन्हीकी अदालत में वीर सावरकर सबसे खतरनाक गुनाहगार थे!

अरे जहाँ कुछ लोग कारावास के नाम पे महलों में फल थे खा रहे,

कालापानी में दस साल कोल्हू थे सावरकर चला रहे!

पेंशन और माफीनामे की बातें ऐसे करते हो,

पूछें हम क्यों छोड़ा नेताजी ने तुम्हारा साथ?

अहिंसा के पाठ ऐसे पढ़ाये की मानो फूल बरसाए थे गोली के बजाय,

बताओ विश्वयुद्ध में मरे भारतीयों के खून से रंगे है किसके हाथ?

अरे बताओ मोपला में जो हुआ उसका जिम्मेदार किसे ठहराया?

बताओ कि आपके रहते जिन्ना ने पाकिस्तान कैसे बनवाया?

बताओ कि 55 करोड़ न देने पर कौन था अनशन पर बैठा?

बरसात में भीगते सीखों को मस्जिदों से निकालने के लिए कौन था ऐठा?

बताओ कितनी लाशों की कीमत है आजादी को पाने में?

बताओ क्या रत्तीभर सच्चाई है अहिंसा के गाने में?

अरे लाख गुना भले है सावरकर, जिन्होंने किया दलित उद्धारण,

ब्राम्हणों के बहिष्कार के बावजुद हिन्दुओ की एकता के लिए नहीं स्वीकारा वीरमरण!

बताओ सोलह साल की उम्र में किसने लिखा जयोस्तुते?

किसने किया जातिवाद निर्मूलन, किसने पहुँचाई थी बंदूके?

अरे बोलो किसके कहने पर चेतनाएं जगी क्रान्तिकारों में?

बोलो किसके कहने पर कर्ज़न को मारा धींगरा ने?

पूरे यूरोप में जिनके चर्चे थे कि अंग्रेज जिनसे है परेशान

मोस्ट डेंजरस क्रिमिनल बोला अंग्रेजों ने, क्या थे उनके काम आसान?

माफिनामों को गौर से पढ़ते तो थोड़ा और समझ जाते,

कईं कैदी न छूटते अगर सावरकर न ये लिखते!

दस सालों तक लिखते रहें कि रिहाई के बाद शांतिपूर्ण रहेगा आंदोलन,

अंग्रेजों को पता था ये छूटे तो फिरसे जागेगा क्रांतिकारियों में चेतन!

अपनी जिंदगी का यूँ जाया जाना उन्हें मंजूर नहीं था बिल्कुल,

और अंग्रेजों संग दिख रहे थे शत्रु कुछ अपनेही मूल!

एकता के ढोंग तले कड़वी सच्चाई थी दबी,

हिंदुओं के पतन को रोकने करना था हो सकता जो भी!

लिख दिया हिंदुत्व सिद्धांत जिसका नहीं बैर किसी मजहब से,

पर कोई आये चढ़के हमारे ऊपर तो नहीं खैर उसे किसी रब से!!

बस यही दिक्कत है आपकी, आपका अपिजमेंट खुला हो जाता है,

अरे हो असली धर्मनिरपेक्ष तो क्यों आपको हर बार सिर्फ हिन्दुओं से ही गिला हो जाता है?

जो इतने कारनामों के बावजुद आपके बाप दादा बैठे है पंडित-महात्मा उपाधि लेकर,

पूरे हक से डंके की चोट पर कहेंगे हम भी अमर रहे स्वातंत्र्यवीर सावरकर!!

–        The DPM

2 Comments

SL Suraj · 20 November 2022 at 3:31 am

    The DPM · 20 November 2022 at 5:32 am

    Thanks Suraj!

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