Blind Love – Part 1

Despite of the heavy rains in the town, Aniruddh’s curiosity couldn’t let him stay in the house and he went to Django’s house.

Django used to live about half a mile from Ani’s house. Ani and Django weren’t friends. They barely knew each other. Django loved Ani’s Sister, Radhika. Django and Radhika were college mates and that’s how Django had a relationship with her.

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चलो मान लिया..!

पता आपको भी है वादा किसने तोड़ा था,

हमसे बेवफाई कर किसी और से रिश्ता जोड़ा था…

कहें थे हम बताइये क्या हमसे अच्छा कोई है..?

जो है तो फिर जाइये खुशहाल, रहे खाली हमारा झोला,

पूरी आजादी के बावजूद भी आप ने झूठ बोला….

हम भी जान गए आपने रुखसत का है ठान लिया…;

कसम वालिदा की खाई आपने, चलो मान लिया…!

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नाक के नीचे से: भाग 2

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे.

नाक के नीचे से – भाग 1

तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था.

हां मैं भी हूँ और मेरा अस्तित्व भी है..!

सालों साल सबसे अलग और अकेला रहता आया हूँ

दोस्तियाँ और मोहब्बतें बस दूर से देखता आया हूँ

अकेले ही अकेले चलते चलते गिरते संभलते बढ़ रहा हूँ

जो आज जमाना कैद हुआ तो धाएँ धाएँ रो रहा है

लगता है तन्हाइयों का मैंने पाया स्वामित्व है

हां मैं भी हूँ और मेरा अस्तित्व है!

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ये आज की बात तो नहीं है!

खुद ही चलकर, खुद ही गिरकर उठके फिर से चलना जो हमें आता है; लाख उठे तूफान फिर भी, दीये की तरह जलना जो हमें आता है; ये आज की तो बात नहीं है! रूह के कतरे मेरे बिखर बिखर Read more…

श्रृंगारिका

कहदो जो एक बार तुम बस पलके झुकाकर, तुम्हारी जुल्फों की छांव में एक पल बिता सकूँ; खामोश हो लब्ज, नजरें बयाँ करे, के तुम्हारी आँखों मे डूबकर मिलेगा सुकून..! के मेरी उँगलियाँ ले नाप तुम्हारे गालों पर, चढ़ती हुई Read more…

कोरोना आणि नास्तिकवादाचे अवडंबर!

जगात मुख्यत्वे आस्तिक, नास्तिक आणि अज्ञेयवादी लोक असतात. अर्थात व्यक्ती तितक्या प्रवृत्ती! परंतु प्रत्येकजण आपापला वाद थोपवण्यासाठी सतत जणू कुठल्या संधीत असल्यासारखा वागतो. कोरोनाचे संकट यात खूप नवी उदाहरणे देत आहे. प्रत्येकजण आपापल्या धर्माचा प्रचार करतोय आणि पटवून सांगायचा प्रयत्न Read more…