डंके की चोट पर कहेंगे वीर सावरकर!

जो किसीपर गोरे साहब अपनी औरतें लुटाने तक मेहरबान थे, उन्हीकी अदालत में वीर सावरकर सबसे खतरनाक गुनाहगार थे! अरे जहाँ कुछ लोग कारावास के नाम पे महलों में फल थे खा रहे, कालापानी में दस साल कोल्हू थे सावरकर चला रहे! पेंशन और माफीनामे की बातें ऐसे करते हो, Read more…

विजयपथ

(सदर कहाणी सत्य इतिहासावर आधारित अशी काल्पनिक कथा आहे. प्राचीन भारतीय इतिहास, कंनौज येथील तिहेरी युद्ध व तत्कालीन राजघराण्यांचा, राजकीय घटनांचा व संबंधित राजांचा केवळ मनोरंजनापूरता उल्लेख असून कथेत सांगितलेल्या सर्वच घटना ऐतिहासिक नाहीत याची सर्वांनी नोंद घ्यावी) ई. स. 792 महाराज ध्रुव धरावर्ष राष्ट्रकुट परत एकदा मोठी सेना घेऊन Read more…

अवध_असम_एक्सप्रेस_एक_प्रेमकहानी!

अवध असम एक्सप्रेस – एक प्रेमकहानी!

अवध – असम एक्सप्रेस डिस्क्लेमर – यह एक सत्य घटना पर आधारित काल्पनिक प्रेमकथा है. इसके सभी मुख्य किरदार काल्पनिक है और इनका 2 अगस्त 1999 को हुई सत्य घटना से कोई भी संबंध नही है. कथा की रंजकता को बनाये रखने के लिए कृपया इस घटना के बारे में Read more…

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गाज़ी शहरे इश्क़ के!

उसकी कोहनी से पकड़कर यूँ नजाकत से खींच लेता पास, तो पूछता, क्या है ज़्यादा खूबसूरत, उसकी आँखें या उनमें डूबने का खयाल? पलके झुकाकर जो वो बिना लफ़्ज़ों के कहदे बहुत कुछ; बता देता हूँ पूरी कायनात की औकात नहीं उन आँखों के झील में समाने की! कुछ गम Read more…

जयोस्तुते – हिंदी अनुवाद

वीर सावरकरजी की सबसे बढ़िया और दिल को छू लेने वाली मराठी कविता जयोस्तुते का हिंदी अनुवाद करने का ये प्रयास. सारे मूल अधिकार स्वर्गीय वीर सावरकरजी के पास रहें, उनको वन्दनस्वरूप मेरी तरफ से ये भेंट हमारे हिंदी वाचकों के लिए. ।।जयोस्तुते, जयोस्तुते श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती Read more…

कल बात करते है….

कल बात करते हैं! हर दिन तो इसी पे खतम होता है, की हम कल बात करते है… यू तो हम बाते करते नहीं है ज्यादा,पर हर बार कहते कि कल बात करते है…इतना परेशान होते हैं हम, की कर देते हैं कभी कभी अपनों को ही नजरअंदाज;दुसरो की परेशानी Read more…

नाक के नीचे से – अंतिम भाग! (भाग 3)

दरअसल अग्रवाल जी ने ये कहा, “देश के अंदर असल में तो ब्यूरोक्रेसी ही राज करती है, ये बात आप भी बखूबी जानते है. हम ब्यूरोक्रेट्स इन सारे नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे हैं और जनता की भलाई करना जानते भी है. इसीलिए लंबे अरसे से सिस्टीम के अंदर सिंडिकेट बनाये रखे लेकिन मजबूत सरकार के सामने हमारा कुछ नहीं चलता. ऐसेमें हमारी जिम्मेदारी बनती है की देश का लोकतंत्र बचाये”

आजोळ

दिवाळी निमित्त अमेय वेळात वेळ काढून कॅनडाहुन चार दिवस आलेला. एका मोठ्या आंतरराष्ट्रीय कम्पनीमध्ये CFO होऊन गलेलठ्ठ पगार उचलणारा, सदैव महागड्या गाड्यांमध्ये फिरणारा अमेय आज खुश वाटत नव्हता. त्याचं आजोळ हरवलं होतं. तसा तो आज सुवर्णा मावशीकडे थांबलेला मात्र आजोळच्या आठवणी आज डोळ्यातलं पाणी थांबू देत नव्हत्या.