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	<title>Hindi Story Archives - Words Of DPM</title>
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	<title>Hindi Story Archives - Words Of DPM</title>
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		<title>नाक के नीचे से &#8211; अंतिम भाग! (भाग 3)</title>
		<link>https://wordsofdpm.com/home/2020/11/19/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[dpm@admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Nov 2020 14:14:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
		<category><![CDATA[detective-story]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Story]]></category>
		<category><![CDATA[political friction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरअसल अग्रवाल जी ने ये कहा, "देश के अंदर असल में तो ब्यूरोक्रेसी ही राज करती है, ये बात आप भी बखूबी जानते है. हम ब्यूरोक्रेट्स इन सारे नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे हैं और जनता की भलाई करना जानते भी है. इसीलिए लंबे अरसे से सिस्टीम के अंदर सिंडिकेट बनाये रखे लेकिन मजबूत सरकार के सामने हमारा कुछ नहीं चलता. ऐसेमें हमारी जिम्मेदारी बनती है की देश का लोकतंत्र बचाये"</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से &#8211; भाग एक</a></p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से &#8211; भाग 2</a></p>



<hr class="wp-block-separator has-text-color has-background has-black-background-color has-black-color is-style-wide"/>



<p class="wp-block-paragraph">उस मुलाकात में अग्रवाल जी ने तिवारीजी से क्या कहा था ये नहीं जानोगे? बड़े पर्दे खुलेंगे आज तो.</p>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल अग्रवाल जी ने ये कहा, &#8220;देश के अंदर असल में तो ब्यूरोक्रेसी ही राज करती है, ये बात आप भी बखूबी जानते है. हम ब्यूरोक्रेट्स इन सारे नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे हैं और जनता की भलाई करना जानते भी है. इसीलिए लंबे अरसे से सिस्टीम के अंदर सिंडिकेट बनाये रखे लेकिन मजबूत सरकार के सामने हमारा कुछ नहीं चलता. ऐसेमें हमारी जिम्मेदारी बनती है की देश का लोकतंत्र बचाये&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तो उसके लिए गैर लोकतांत्रिक बलों का सहारा लेंगे?&#8221; तिवारीजी ने प्रतिप्रश्न किया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;बात ऐसी नहीं है तिवारीजी. हमे बेशक अंदाजा था कि देश मे माओवादी नेटवर्क है पर इतना बड़ा होगा ये नहीं पता था. हमारे पार्टी के कुछ सदस्य जो इसी एजेंडा को पार्टी के झण्डे के नीचे से चला रहे थे उनको हमने निकाल दिया. हमें तो तीसरा विकल्प खड़ा करना था&#8221; &#8211; अग्रवाल जी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तो इसके लिए जिनको सहारा दिया वो सारे विकल्प मिटाने आनेवाले है अभी. याद रखिये अगर देश मे दंगे हुए तो मैं खुद आपको गिरफ्तार करने आऊंगा&#8221; &#8211; तिवारी जी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;आपका स्वागत रहेगा. लेकिन ये भी तो जान लीजिए कि क्या हमारा इन लोगों से सच मे कुछ लेना देना है भी या नहीं? चुनाव होने तक तो मुझे प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलना लाज़मी था न तिवारीजी? अब इनके खिलाफ बोलनेवालों में इकलौते हम थोड़ी है? तो अब हमें देश का दुश्मन बनाओगे? याद रखिये कल चलकर इनका दिमाग घूम गया और पुरानी सरकार के लोगों को धड़ाधड़ गिरफ्तार करने लगे तो एक हम ही विपक्ष के रूप में बचेंगे. फिलहाल तो आपको इतना बता दूं कि माओवादियों को सत्तापक्ष के साथ साथ विपक्ष से भी नफरत होती है. इसीलिए हमें इस बात पर लड़वाया जा रहा है. भरोसा न हो तो कविराज से पूछिए. साथ नहीं पर आज भी भरोसेमंद आदमी है.&#8221; अग्रवाल जी बोले.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तो आप प्रधानमंत्री जी की मदद क्यो नहीं करते?&#8221; &#8211; तिवारी जी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;हम करेंगे. लेकिन उनकी तरफ से भी हमें थोड़ी सहूलियत मिले. हर बात में टांग अड़ाते हैं एलजी साहब. पता नहीं चलता क्या की किसके इशारे से हो रहा है? आपको देश की इतनी ही फिक्र पड़ी है तो राज्य की सरकारों को विकास करने से क्या रोक रहे हो? सहयोग दोनों तरफ से होगा तभी हम अपनी तरफ से बोलेंगे वरना तो मजबूत सरकार है, जैसा आपको ठीक लगे वैसा करिए!&#8221; &#8211; अग्रवाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;आपका ये संदेश पहुंचाने का काम मेरा नही है अग्रवाल जी. आप बातें मत घुमाइए. आपपर शक महज इसलिए नहीं है कि आप माओवादियों के चहिते है, बल्कि आपमे वो गुण दिखते भी है. गलती सुधारने का एक मौका देंगे हम. जानकारी दीजिये और सलामती रखिये. चलता हूँ&#8221; तिवारीजी ने जाते वक्त कह दिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उस दिन ये बातें होने के बाद ही तिवारीजी को अंदाजा लग चुका था कि गिरगिट को शर्म आजाये इतने रंग बदलने के बावजूद अग्रवाल जी के मिजाज में जो विश्वसनीयता थी उसके पीछे भविष्य का बहुत बड़ा हात है&#8230;देश और अग्रवाल जी के भविष्य का.</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्तमान में प्रधानमंत्री पर देश की जनता का अटूट विश्वास एवं माओवादियों समेत सारे विपक्ष की गिद्ध जैसी नजर यही सत्य था. उस दिन मिटिंग में प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री दोनों ने माओवादियों को अहिंसा से मारने का सुझाव दिया था, लेकिन ये सिरे से गलत लग रहा था. क्योंकि सामनेवाला हथियार तानकर खड़ा हो तो भी क्या दिमाग से काम लेंगे? माना कि उनकी पूंजी खत्म कर देने पर उनकी ताकद कम हुई थी. लेकिन माओवादी किसी भेड़िये से कम थोड़ी थे, जितने ज्यादा भूखे उतने ज्यादा खूंखार. क्या सुझाव होगा पता नही, लेकिन कुछ तो गड़बड़ जरूर थी. विधायक वाटवे को भी उन्होंने नहीं मारा था तो फिर किसने मारा होगा?</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंत मे एक बार तिवारीजी समझ ही गए. अब सिर्फ देश की फिक्र में सोचकर उन्होंने पूरा प्लान बनाया. इसके लिए अग्रवाल जी का साथ होना जरूरी था.</p>



<p class="wp-block-paragraph">अग्रवाल जी&#8230; राजनीति के कच्चे, विकास के पक्के पर रौंदू बच्चे जैसा व्यवहार. क्या इतना ही सच था?</p>



<p class="wp-block-paragraph">मिले थे वो माओवादियों से, उनकी सिस्टीम को यूज करके दो बार सीएम बने. दूसरा हाथ प्रधानमंत्रीजी के पास हमेशा से गिरवी रहा. एक ओर कविराज जैसे दक्षिणपंथी विद्वान तो दूसरी ओर जितेन्द्र जाटव जैसे कथित बुद्धिवंत एवं माओवादी. हर तरफ से अपने लिए समर्थन एवं ताकद को बनाये रखते हुए चले जा रहे थे. कविराज, जाटव, कबीरा बेदी, यास्मीन अंसारी जैसे बड़े बड़े नेता यही न देख पाए, या फिर समझ गए और अग्रवाल जी को छोड़कर चले गए. इन सबकी मेहनत का फल अब अकेले अग्रवाल जी चख रहे थे. दिल्ली की जनता का विश्वास इस कदर जीत लिया कि भलेही दिल्ली ने प्रधानमंत्री के तौर पर &#8216;उन&#8217;को चुना हो पर विधानसभा में उनके पक्ष की एक न चलने दी. </p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी तजुर्बेकार थे. अग्रवाल जी की चाल को बड़े अच्छे से जान गए थे. इसी लिए प्रधानमंत्रीजी ने माओवादियों के प्रचारतंत्र एवं योजनाओ की जानकारी के बदले दिल्ली विधानसभा पूरी तरह छोड़ दी. वरना काँटे की टक्कर तो तय थी विधानसभा में. शायद पाँच साल बाद अग्रवाल जी प्रधानमंत्रीजी के पक्ष से गठबंधन बना भी लेंगे, लेकिन दस साल बाद अग्रवाल जी खुद प्रधानमंत्री बन जाएंगे ये तो अब दिनबदिन निश्चित होता जा रहा था. जिसने 50 साल पुरानी पार्टी और 100 पुराने संघठन के लोगों से शर्ते मनवाई हो उसके बारे में इतना तो कह ही सकते है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इधर जाधव साहब को काफी तकलीफ देने के बाद आखिरकर देशपांडे जी ने प्रस्ताव रख ही दिया. तमाम माओवादी संस्थाओं को अपनी ओर से बंद कराएंगे तभी आपके साथ सरकार बनाएंगे. जाधव साहब को झुकना ही पड़ा. </p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;बड़ा बखूबी खेल गए आप गृहमंत्री जी. अब दिल्ली जेब मे और महाराष्ट्र मुट्ठी में. माओवादियों के दंगे इससे तो नहीं रुकेंगे. तो फिर ये सारी एक्शंस और माओवादियों के खिलाफ कार्यवाही सिर्फ सरकारे बनाने के लिए था? माफ कीजियेगा सर एकबार झुंड के हाथ मे कानून चला जाये तो भगवान भी नहीं बचा पायेगा.&#8221; तिवारीजी बोले</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तिवारीजी क्या है, देश की तो रक्षा करनी ही है. माओवादियों का क्या है आज है, कल नहीं, लेकिन हमारा होना बहुत जरूरी है. आपको मुख्य सचिव इसी लिए बनाया था. आपको ईमानदारी से काम करनेसे कोई नहीं रोकेगा. आप रक्षा के मामले में कोई कसूर नहीं छोड़ेंगे पता है, और न हम देश का अंदरूनी माहौल बिगड़ने देंगे. लेकिन इसी का उपयोग करके सारे पक्ष जब राजनीति करते है तो हमे भी करना पड़ता है. बस उसकी चिंता मत कीजिये, बाकी देश सकुशल रहे ये हमारी जिम्मेदारी रही.&#8221; गृहमंत्री जी ने जवाब दिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">पता नहीं क्या दिमाग मे आया, तिवारीजी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी को उनके घर जाकर गार्डन में चाय पीते हुए घरेलू बाते करनेकी इजाजत मांगी. रविवार सुबह का वक्त जैस्वाल जी ने खास निकाला. उस मीटिंग में जैस्वाल जी ने सच सच बता दिया कि माओवादी असल मे काफी ज्यादा खौफ में है. जब तक उनकी नकेल सरकार ताने हुए है तब तक वो खौफ में ही रहेंगे, गृहयुद्ध के बारें में तो सोचेंगे भी नहीं और इतने में जो समय मिले उसमे उनके नेटवर्क की सारी नसें काट देना संभव था.</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिवारीजी फिर एक बार अग्रवाल जी से मिलने उनके दफ़्तर पहुंचे. अबकी बार उनके हाथ मे दो वारण्ट और एक समन्स नोटिस था. सब अग्रवाल जी के नाम. वारंट एक गृह मंत्रालय एवं एक सीबीआई से, तो समन्स नोटिस ईडी की तरफ से थी. अग्रवाल जी फिर भी अपेक्षा से थोड़ा कम ही डरे. पहुंचते ही आव न ताव देखे अग्रवाल जी को तिवारीजी सीधा अपनी गाड़ी में बिठाकर गिरफ्तार कर ले गए. एलजी ने भी इसकी इजाजत दे दी थी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;अब बताइये जो भी बताया क्या वो सच है?&#8221; तिवारीजी ने पूछा</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;सही समय पर सच बोलकर हि मैं राजनीति करता हूँ. मुझे झूठ का सहारा लेने की जरूरत अक्सर कम पड़ती है&#8221; &#8211; अग्रवाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तो ये भी बता दीजिए कि माओवादी नेटवर्क को कैसे संभाल रहे है आप?&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;इधर आपके गृहमंत्री विधायकों की घोड़ाबाजारी करते है तो हम इन गुनाहगारों की करते है. एक एक करके सब शहरी माओवादी मेरे ही हाथों केंद्र सरकार के हत्थे चढ़ेंगे और उन्हें पता भी नहीं चलेगा.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;और अगले चुनाव में कौनसी ताकद सहारा देगी&#8230;?&#8221; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;क्या लगता है आपको? प्रोग्रेस पार्टी में बागी लोग बदलाव क्यों नहीं ला सकते? मैंने ही माओवाद की दिशा प्रोग्रेस पार्टी की ओर बढ़ा दी है. उनको लग रहा होगा माओ के तरीके से सत्ता अपना लेंगे, पर असल मे तो संवैधानिक तरीके से महरूम हो जाएंगे और इलेक्शन में कमजोर पड़ जाएंगे. बाकी विपक्ष उनके साथ नहीं जाएगा. हम प्रधानमंत्री जी से गठबंधन बनाएंगे और केंद्र की सत्ता में घुस जाएंगे. दिल्ली देख लेंगे हमारे कार्यकर्ता.&#8221; &#8211; अग्रवाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;और उसके अगले चुनाव में खुद आप प्रधानमंत्री बन जाएंगे. अच्छा काट देते हो आप बैठे बैठे ही. भला सरकारी अफसर हूँ पर राजनीति समझ सकता हूँ. इतनाही सच है कि आप किसीके सगे नहीं हो!&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;आपकी राय को मैं नहीं बदल सकता. पर इतना जरूर कहूँगा. अगर ललवानी-चौपाई जी की जोड़ी 2 सांसदों के बावजूद जड़ें बनाकर टिकी न होती तो आज प्रधानमंत्री कोई और होता. हर बार किसी भी पदासीन को हटाने के लिए नए तरीके आजमाने पड़ते है. साहिबे-मसनद आज जो है, उनके अलग थे, तो उन्हीके तरीके उनपर नहीं चलेंगे. खैर आपको क्या ही बताएं हम अभी से. आप जान तो गए है पर मान नहीं रहे है, और आपके मंत्रीजी जान गए और हमारी शर्तों को मान भी गए.&#8221; &#8211; अग्रवाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;मुझे आपकी आनेवाली राजनीति का अंदाजा अच्छी तरह से आया है. अग्रवाल जी आखरी बार बोल रहा हूँ, जो समझौता हुआ है आपके और प्रधानमंत्री के बीच, क्या आप उसे निभाएंगे? अगर नहीं, तो माफ कीजिएगा मुझे आपपर नॅशनल सिक्युरिटी एक्ट लगाना पड़ेगा अभी के अभी. सालभर में आपकी पहचान और राजनीति दोनों खत्म होगी इसकी मैं गारंटी देता हूँ&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;ब्रम्हास्त्र सही समय पर निकाले हो आप. पर जरूरत नहीं थी तिवारीजी हम अपना वादा निभाएंगे. ये लीजिये दिल्ली सरकार की तरफ से चार्जशीट दाखिल कराने की परमिशन . जगदीश्वर नॅशनल यूनिवर्सिटी के राष्ट्रद्रोही छात्रों की आगे की किस्मत. हमारी तरफ से उनका समर्थन भी बंद होगा. अब आप अपने तरीके से संभालिये. हमें अपने रस्ते पर चलने दे, और हां, माओवाद के साथ साथ ISI के पिद्दी और आज भी रशिया और अमरीका के स्पाइज भारत मे है. सबकी नकेल आपके हाथ मे है. आपके मंत्रीजी जान बूझ कर इनको सिर्फ डराते रहते है और हम जैसों की नस पकड़ने की कोशिश करते है. अगर ये खत्म हुए तो हमारे साथ किसके सम्बन्ध जोड़ेंगे जो हमे देशद्रोही कहा जाए? ये है पूरा सच. हम भी खेल रहे है, अपनी तरफ से इनसे सम्बन्ध समाप्त करेंगे तो देखते है क्या आरोप करते हो आप भी?&#8221; &#8211; अग्रवाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;ये मत समझना कि तहकीकात खत्म हुई है आपकी. मैं जब तक ड्यूटी पर हूँ, या यूँ कहिये जब तक जिंदा हूँ तब तक आपपर न तो पूरी तरह से भरोसा करूँगा न आपके उपरसे नजर हटाऊंगा. आपके विधायकों के उपर चल रहे केसेस फिलहाल स्थगित रहेंगे. कुछ भी गड़बड़ हुई तो विधायकों समेत आप भी अंदर होंगे.&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिवारीजी उसके बाद सीधा जैस्वाल जी के घर गए जहाँ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पहले से मौजूद थे.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;क्या तिवारीजी, कहाँ थे आप? आपके हिस्से के गुलाबजामुन मैने गृहमंत्री जी को नहीं दिए और आप देर करते हो?&#8221; जैस्वाल जी के लतीफ़े से प्रधानमंत्री जी हसने लगे.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;अजी मेरा क्या हिस्सा हमारी तो जान हाजिर है. वैसे प्रधानमंत्रीजी, लुटियन्स का गिरगिट बड़ा शातिर निकला.&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;तिवारीजी आपने अपना काम बखूबी किया है. उस गिरगिट के भविष्य का सही समय पर इलाज करेंगे. फिलहाल वो हमारा है तो निकलवाएंगे सारे काम. ऐसेही तो चलेगा लोकतंत्र. या तो सरकार बटें या फिर विपक्ष, मतभेद जरुरी है. और इस मतभेद के लिए सही मात्रा में जहर भी जरूरी है. जहर जो उनको भी खा जाए और हमारी भी दुश्मनी ओढ़ लें. माओवादियों को रहना पड़ेगा और हमारे इशारों पर ही रहना पड़ेगा. आप अंदरूनी शांतता का ध्यान रखने में कोई कसूर न छोड़ना. दुश्मन देश भी बड़ा अजीब है, पचास साल से पिद्दी पाल रखे है लेकिन जवानों को शहादत देने के अलावा कुछ नहीं कर पाए. और जो शहरी नक्सली है उनसे निपटने के लिए तो NSA है ही. ये है पूरी बात कीचड़ में कमल खिलने की. समझे तिवारीजी?&#8221; &#8211; गृहमंत्री</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;समझ गए. अग्रवाल जी से फिर भी बचके रहिये.&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;अग्रवाल जी आस्तीन का ऐसा सांप है जो दाँत निकालने के बाद भी डसने की क्षमता रखता है. पता है ऐसे सांपो से कैसे पेश आया जाता है?&#8217; &#8211; जैस्वाल जी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;आज्ञा दीजिये प्रधानमंत्री जी, कुचल देंगे. अभी उसी सांप ने ये वामपंथियों को निपटाने का जहर दे दिया है वरना अभी उसका किस्सा ख़त्म कर देते!&#8221; &#8211; तिवारीजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;अग्रवाल जी है, तभी प्रोग्रेस पार्टी और अन्य वामपंथी गिरोह का जनता में कुछ नहीं चलता. जनता को या तो हम चाहिए या कोई और, ये कोई और जो है, वहीं अग्रवाल जी है. और अगले पाँच दस साल तक वो हमारी बी-टीम बने रहेंगे.&#8221; &#8211; प्रधानमंत्री जी</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;और ये छात्र नेताओं का क्या? उतावला हुँ उनको कुत्तो की तरह घसीटते हुए कारावास में डालने के लिए&#8221; अग्रवाल जी ने कहा.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;सम्भल कर अग्रवाल जी, सत्य को तोड़ मरोड़कर पेश करके जनता में कन्फ्यूजन पैदा करना और उन्हें लड़वाना इसमें वामपंथियों का हतखंडा लेनिन के जमाने से है. हमे बस उनकी नकेल कसकर रखनी होगी. नकेल अभी आपके हाथों में है. मिलिए उस कृष्ण कुमार से और चाहें तो दो चांटे भी रख देना, मगर उन्हें अरेस्ट मत करना. आगे से कोई भी देशविरोधी गतिविधि न करे इसका ख्याल रखने के लिए ये सबूतों की नकेल हमेशा काम आयेगी. कोर्ट में यही सबूत थोड़े थोड़े करके पेश करते रहना और तारीखे बढ़ाते रहना. उनका देशविरोधी आंदोलन उन्हीके <strong>नाक के नीचे से </strong>इस कदर हाईजैक करना कि सांप भी मरे और लाठी भी न टूटे!&#8221; &#8211; गृहमंत्री</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;जैसी आपकी आज्ञा.&#8221; कहते हुए तिवारीजी निकल लिए.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>पाँच साल बाद&#8230;.</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>सत्ताधारी लोकतांत्रिक जनता पक्ष को अबके चुनाव में 260 सीटों पर जीत मिली. सत्ता स्थापना का पहला अवसर जायज उन्हींको मिलना था. अग्रवाल जी की जनकल्याण पार्टी ने पूरे 70 सीट हासिल किए और सेकंड लार्जेस्ट पार्टी बन गए. वहीं प्रोग्रेस पार्टी को देशभर में केवल 65 सीटों पर अपना समाधान मानना पड़ा और तमिल नैशनल पार्टी जैसे दक्षिण भारत की स्थानीय पार्टियाँ अपना अपना 30-40 सीटों का किला संभाले हुए थे. देशभर मे कम्युनिस्ट पार्टी को केवल 12 सीटें मिली. जायज था कि अग्रवाल जी किंगमेकर बननेवाले थे किसी भी हाल में.</em></p>



<p class="wp-block-paragraph">अग्रवाल जी खुद से ही लोकतांत्रिक जनता पार्टी के पास गए और कहें, &#8220;दो शर्तें है तभी गठबंधन करूँगा. एक तो ये की हमें गृहमंत्री बनाया जाए, और कोई भी बड़ा मंत्रिपद हमे न मिले तो भी चलेगा. दूसरी शर्त, प्रधानमंत्री जी अगले साल जब रिटायर होंगे, तब देशपांडे जी को प्रधानमंत्री बनाया जाए वरना उस वक़्त हम बगावत कर देंगे.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">लोकतांत्रिक पार्टी के खेमें में हड़कम्प मच गया. देशपांडे जी तो अभी उनकी पार्टी से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे और कहीं से कहीं तक राष्ट्रीय नेतृत्व का दावा नहीं करते थे. उनकी सिफारिश खुद अग्रवाल जी से सुनते ही पहले तो पार्टी अध्यक्ष चड्ढा जी ने हाँ कर दिया और बाद में देशपांडे जी के ऊपर पार्टी के अंदर जाँच के आदेश दिये गए.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इधर वर्तमान प्रधानमंत्री ने फिरसे शपथ ग्रहण कर लिया. अग्रवाल जी अब गृहमंत्री बन गए. लोकतांत्रिक पक्ष देशपांडे जी की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को कुचलने ही वाला था कि देशपांडे जी महाराष्ट्र के सारे सांसद लेकर पार्टी मुख्यालय पहुंचे. पूरे 48 अपनेही सांसद और 70 अग्रवाल जी के अगर समर्थन वापस लेते तो सरकार अल्पमत में आ जाती. देशपांडे जी ने अपने गॉडफादर नागपुरकर जी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के साथ साथ प्रधानमंत्री बनने की माँग रखी जिसे मजबूरन स्वीकार किया गया. नागपुरकर जी अध्यक्ष बनते ही रिटायरमेंट से पहले ही प्रधानमंत्री जी को निकाला गया और देशपांडे जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली. पूरी पार्टी और प्रधानमंत्री पद दोनों अब देशपांडे जी के कब्जे में थे.</p>



<p class="wp-block-paragraph">मार्गदर्शक मंडल के अध्यक्ष बनने पर उन्हें &#8220;बधाई&#8221; देने के लिए गृहमंत्री अग्रवाल जी पहुँचे, तब प्रधानमंत्री जी ने कुछ यूँ कहा. &#8220;हममें और देशपांडे में फर्क है अग्रवाल जी. हमने ललवानी जी को मार्गदर्शक मंडल में भेजा था क्योंकि हमारे बिना पार्टी का सत्ता में आना मुश्किल था. देशपांडे जी ने हमें मार्गदर्शक मण्डल में वक्त से पहले ही डाल दिया. सब आपके साथ मिलकर किया पता है, पर याद रखिये हमने आपको कभी धोखा नहीं दिया था, और देशपांडे जी की हरकतें आप अपनी आँखों से देख रहें है. मैं कामना करूँगा की पांच साल बाद आप प्रधानमंत्री बने.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">क्या ये बताना जरूरी है कि अग्रवाल और देशपांडे जी को मिलाने का काम तिवारीजी ने किया था?</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>The End</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Written with warm regards by</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Dnyanesh Make &#8220;The DPM&#8221;</strong></em></p>
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		<title>नाक के नीचे से: भाग 2</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dpm@admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jul 2020 05:39:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
		<category><![CDATA[detective-story]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Story]]></category>
		<category><![CDATA[Political Fiction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे.</p>
<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/29/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/">नाक के नीचे से: भाग 2</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a></p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से – अंतिम भाग!</a></p>



<hr class="wp-block-separator has-text-color has-background has-black-background-color has-black-color is-style-wide"/>



<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे. मुम्बई में पले बढ़े, IAS बने और देश की सेवा में गृह सचिव के पद तक पहुंच गए. IB की तरफ से गृह मंत्रालय को खबर मिली थी कि शहरों में छुपे हुए माओवादी बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र के बीस बड़े शहरों में दंगे कराने वाले है. इसमें महाराष्ट्र सरकार के लोग भी शामिल है और प्रदेश के बड़े राष्ट्रीय नेता जाधव साहब का सीधे तौर पर IB की तरफ से नाम आया था. महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय से इस बात का कोई जिक्र तक नहीं हुआ था. तिवारी जी अपनी तरफ से जायजा लेने खुद पहुंचे थे, गृहमंत्री जी को बोलने से पहले. तिवारी जी इसीलिए नहीं चाहते थे कि मुख्यमंत्री जी से हुई उनकी कोई भी मुलाकात मीडिया को पता चले. वो मंत्रालय से छुट्टी लेकर घर जाने के नाम से निकले थे. बिना अपॉइंटमेंट के सीएम साहब से मिलना उनके लिए कोई खास मुश्किल काम नहीं था. बहरहाल सरकार बचाने के चक्कर मे मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को बाहर नहीं आने दिया. एक चाल तो तिवारीजी बखूबी चल गए. भला पाटिल साहब राजनीति के कच्चे हो लेकिन किसी पदासीन मुख्यमंत्री को इतनी चतुराई से गुमराह करना बड़े बड़े राजनेताओं को न आता हो, लेकिन इस अधिकारी ने कर दिखाया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन क्या सरकार गिरने से खतरा टला था? जाधव साहब की पार्टी के विधायक की हत्या हुई थी. संकट अभी बढा था.</p>



<p class="wp-block-paragraph">और इस तरफ जाधव साहब की चिंताएं भी. क्या जाधव साहब सच मे माओवादियोंसे मिले थे..? देखेंगे&#8230;.</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वालजी को केंद्रीय गृहमंत्रीने तुरंत बैठक में बुलाया. जैस्वाल जी और तिवारी जी इकट्ठा मतलब जेम्स बॉन्ड और शेरलॉक होम्स की जोड़ी. और उस मीटिंग में माओवादियों की सारी हरकतों का किस तरह पर्दाफाश किया गया इसका रिपोर्ट दोनों ने दिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">IB अपनी तरफ से देश के दुश्मनों पर कड़ी निगाह बनाये रखता है. लेकिन कुछ बातें उनकी पकड़ में नहीं आ सकती थी. फिर भी संभाव्य माओवादी आक्रमण का अंदाजा उन्हें आया था. हमला किस प्रकार होनेवाला था इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल था.</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिवारीजी जिस दिन दिल्ली से निकलने वाले थे तो जान बूझ कर सीधे रास्ते मुम्बई नहीं आये. ये खबर तो माओवादियो को लग गई थी और वो अपना प्लान रद्द करनेवाले थे, क्योंकि पकड़े जाते. लेकिन तिवारीजी लखनऊ गए और उस वक़्त ऐसा दिखाया गया कि यूपी के गृहमंत्री से उनका काम चल रहा है. दंगे भी उस रात उन्होंने खुद लगाए थे जिसके चलते माओवादियों को भरोसा हो जाये कि केंद्रीय गृह सचिव महाराष्ट्र नहीं आएंगे. उन दंगो में जान का कोई नुकसान नहीं हुआ ये आश्चर्य नहीं था. आधी रात को स्पेशल फ्लाइट लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह मिल लिए और इसकी कानोकान खबर नहीं लगी किसीको, क्योंकि बेट ही लगी थी महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर. अगर सरकार बचती तो साथी दल के जो नेता उस वक्त गृहमंत्री थे उनको निकाल के तिवारीजी आएंगे ऐसा मुख्यमंत्री जी से तय किया गया. यही पे तिवारीजी का सबसे बड़ा दाँव था. दरअसल महाराष्ट्र सरकार का साथी दल और राज्य के गृहमंत्री शामिल थे. उनको बिना अंदाजा लगाए उनपे नजर रखनी थी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस नाटक के दूसरे छोर पर पर्दा लिए बैठे थे राज्य के विपक्ष नेता और केंद्र सरकार के पक्ष से देशपांडे जी, जो राज्य के पूर्वी गृहमंत्री रहे थे और महाराष्ट्र के माओवादी नेटवर्क को अच्छी तरह से पहचानते थे. उनकी दूसरी खासियत ये थी के सभी दलों के सभी बड़े नेता और लगभग हर विधायक से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे. 58 बागी विधायक तोड़ना कोई बड़ी बात नहीं थी. सरकार गिरना तो इस प्लैनिंग में बड़ी ही आम प्रक्रिया रही.</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार गिरने के सोलहवे दिन माओवादीयों को पालनेवाले समाजसेवी संगठन किस तरह पकड़े गए ये नहीं समझा? चलिए समझाते है. उन 58 बागी विधायकों को दिल्ली से 32 किमी दूर एक रिसॉर्ट में रखा था. उनमे से एक था वाटवे. इस वाटवे का पकड़े गए चंदू केशव से जीजा-साले का रिश्ता था. भलेही वाटवे खुद उसमें शामिल न हो पर वो चंदू की हरकतों से वाकिफ था. रहीम कला मंच तो राडार पर था ही, चंदू के रिश्तेदार को इस कदर दबोच लिया गया कि न सिर्फ चंदू, उसने रहीम कला मंच समेत महाराष्ट्र के कई माओवादी संघठनों के पते खोलकर रख दिये.</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन सुरक्षित रिसोर्ट में घुसके विधायक वाटवे की हत्या करवा दी उन्ही माओवादियोंने..!</p>



<p class="wp-block-paragraph">उस शाम स्पेशल मीटिंग के तहत तिवारीजी दिल्ली के मुख्यमंत्री अग्रवाल जी से मिले. उनसे मिलते ही इस सारे षडयंत्र का आगा पीछा जान गए तिवारी जी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">शाम को गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ हाई लेवल मीटिंग में कुछ यूं रिपोर्ट किया तिवारीजी ने.</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;देश के कई IAS और IPS दर्जे के अफसर पिछले 25 सालों से माओवाद की जड़ों को ब्यूरोक्रेसी के अंदर मजबूत करने लगे है. घोटालों की सरकार को गिराने के आंदोलनों में दो महत्वपूर्ण ताकतों का योगदान रहा. एक थी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और दूसरी माओवादी विचारधारा. जहाँ एक ओर राष्ट्रवादी सेवा संघठन की लगभग सौ साल पुरानी ताकत अपने सपने को साकार करते हुए सत्ता में आ गयी, उसी वक्त इसी लहर पे चढ़ कर माओवाद की नौका ब्यूरोक्रेसी से चलकर राजनीति में आ गई. अब तक न्यूज मीडिया, प्रोफेसरों, साहित्यिकों एवं समाजसेवकों में ऊंचे पायदान तक पहुंचे हुए माओवादी अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन गए है. ये किसी मायावी राक्षस से कम नहीं है. ब्यूरोक्रेटिक माओवादियों के मसीहा को अगर सलाखें दिखाई जाएं तो सालभर के अंदर अंदर ये कीचड़ साफ कर देंगे..&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;बिना कीचड़ के कमल कैसे खिलेगा?&#8221; गृहमंत्री जी ने कहा</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;मंत्री जी आप कहना क्या चाहते है?&#8221; तिवारी जी ने पूछा</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्रीजी बोले, &#8220;देखो तिवारी, हम उस संघठन में 20 साल तक रहें है जिसकी जान पर ये माओवादी आफत बने है. क्या लगता है प्रधानमंत्री बनतेही इनको खत्म करना हमें न आता? बल का प्रयोग अगर हम करेंगे तो समझ लेना उनके मकसद में हमने हाथ बटा लिया. वो चोरी छिपे इतना कर सकते है तो क्या हम छुपकर ही उनके मकसद नहीं तोड़ सकते? अग्रवाल जी कल मिलने आएंगे. उनका बिभीषन हम छीन लेंगे तो देखते है कैसे टिकते है हमारे सामने. आप अपना काम करते रहिए मगर गांधीजी को न भूलिए. और हां, विधायक की हत्या में उनका कोई हाथ नही है!&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब तक जिस शेरलॉक वाले दिमाग से चल रहे थे तिवारी जी,चाणक्य नीति सामने आते ही अचरज में आ गए. मीटिंग के बाद वो जैस्वाल जी से मिले. जैस्वाल जी ने आनेवाले प्लान के बारें में उन्हें समझाया. सुनकर तिवारीजी बस इतना बोले, &#8220;तो अभी तक जो कार्रवाइयाँ हुई उनका मकसद सिर्फ जाधव साहब को डराना था? और अगर माओवादी कल चलकर दंगे भड़काएँ तो?&#8221;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>&#8220;तो फिर भगवान जाने क्या होगा उनका&#8230;लेकिन फिलहाल के लिए वो ये बेवकूफी वो नहीं करेंगे&#8230;&#8221; जैस्वाल जी ने कहा&#8230;</em></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>To be continued&#8230;.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Warm Regards,</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Dnyanesh Make &#8220;The DPM&#8221;</strong></em></p>



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</div>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dpm@admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2020 10:11:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
		<category><![CDATA[detective-story]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Story]]></category>
		<category><![CDATA[Political Fiction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था.</p>
<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/28/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">खराब मौसम के चलते जहाज का उड़ान भरना मुश्किल लग रहा था. तिवारी साहब ने रास्ते से जाने का फैसला लिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था. दिल्ली से अपनी चार्टर्ड फ्लाइट से निकलकर दो घंटे में आने का नियोजन असफल रहा, बाकायदा अभी दस घंटे में पहुंचना था. बारिश के कारण वो भी असंभव सा लग रहा था.</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूपी के गृह मंत्रालयसे बात करके लखनऊ से मुम्बई चार्टर्ड   फ्लाइट का इंतजाम कराया गया. रात के साढेआठ बजे तिवारी साहब दिल्ली से लखनऊ गाड़ी से रवाना हुए.</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ में उस रात अचानकसे हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क गए. कुछ कारनामों की बू आने लगी. यूपी राज्य के गृहमंत्री ने तिवारी जी को आश्वासन दिया कि वो अपने लेवल पे सब संभाल लेंगे और तिवारी साहब निश्चिंत होकर मुम्बई के लिए रवाना हो दिए. </p>



<p class="wp-block-paragraph">पहुंचते ही उन्होंने मुख्यमंत्री जी से उनके घर जाकर बात की वो भी सुबह छह बजे. तिवारी जी ने उनको बताया कि महाराष्ट्र में सरकार गिरने वाली है. सत्तापक्ष के कईं विधायक विपक्ष, जो कि केंद्र में सत्तापक्ष था, उनके सीधे संपर्क में थे. अब क्योंकि महाराष्ट्र में गठजोड़ की सरकार थी तो मुख्यमंत्री जी परेशान तो हुए. उन्होंने तिवारी जी से पूछा कि आप हमपे इतने मेहरबान क्यों हो रहे हो. तिवारी जी ने सरलता से जवाब दिया, &#8220;पाटील सर मी मराठी आहे. माझ्या कारकिर्दीत सोळा वर्षात सहा मुख्यमंत्री पाहिलेत मी, पण सत्तेत असताना किंगमेकर आणि नसताना सत्ताधाऱ्यांचा कर्दनकाळ अशी आपल्या वडिलांची ख्याती होती. सरकार पडण्यापासून तर वाचवणारच आणि मोबदला घ्यायला सुद्धा येणारच. सध्या राज्याचे गृहमंत्री आहेत त्यांना राहुद्या काही काळ, माझ्यासारखा अनुभवी माणूस तुम्हाला येत्या काळात गरजेचा आहे. गृहमंत्रीपद हा आमचा मोबदला.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">ठीक वैसा ही हुआ. महाराष्ट्र के सत्तापक्ष के कुल 58 विधायक केंद्रीय सत्तापक्ष के हाथ लग गए. सरकार अल्पमत में आ गई. अब मुख्यमंत्री पाटिल का पूरा भरोसा तिवारी साहब के ऊपर था. तिवारी साहब उन सारे विधायकों को वापस भेजने का प्रबंध करनेवाले थे. तिवारी साहब ने बड़ा धोखा दे दिया. सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन शुरू हो गया. केन्द्रिय सत्तापक्ष सत्ता स्थापना की कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था. बहरहाल उनका यही खामोश संयम महाराष्ट्र सत्तापक्ष के भागीदार जाधव साहब का सिरदर्द बन गया. राष्ट्रपति शासन के चलते उनके आनेवाले मनसूबो पर पानी फिर गया था. 15 दिन ऐसेही गए.</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोलहवे दिन अचानक खबर आई. IB के राडार पर रहनेवाली तमाम संस्थाएं देशभर में बंद कराने के सरकारी ऐलान हुए. पुणे का रहीम कला मंच भी इसमें शामिल था. IB के मुताबिक ये सारी संस्थाएं समाजसेवा की आड़ में देश के दुश्मनों के हाथ मजबूत किया करती थी. भारत के अंदर बहुत बड़े गृहयुद्ध की तैयारी में लगी हुई थी. रहीम कला मंच के सबसे बड़े कथित कलाकार एवं कथित समाजसेवी चंदू केशव को गिरफ्तार किया गया. जाधव साहब की चिंताएं और बढ़ी. ये वहीं चंदू केशव था जो समाजसेवा की आड़ में जाधव साहब का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार भी करता था जिसके बदले उसे बहुत सारा काला पैसा मिलता था. चंदू केशव पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लग गया. अगर कड़ी खुलती तो यही कानून जाधव साहब पर भी लगनेकी आशंका थी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उस शाम जाधव साहब को फोन आया, केंद्रीय सत्तापक्ष एवं राज्य विपक्ष के एक युवा नेता, देशपांडे साहब, जो पिछली सरकार के गृहमंत्री रह चुके थे उनका. </p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;जाधव साहेब अपरिपक्व नेत्यांसोबत सत्तास्थापणेचा हाच एक तोटा असतो, माघारी अशी एखादी चूक करू शकतात ज्याची भरपाई करणं जड होऊन बसतं. साहेब अजून पण संधी आहे, ज्यांना कुत्रे समजून प्रचाराला ठेवलात ते लांडगे आहेत, एक दिवस तुमच्याही बकऱ्या खायला कमी करणार नाही. आमच्या हवाली करा त्यांना आणि केंद्रात मंत्रिपद घेऊन राज्यात आमच्यासोबत या. तुमच्यावर फार कमी वेळा विश्वास टाकला जाऊ शकतो. नाहीतर मला पर्वा नाही साहेब राष्ट्रपती राजवटीत सुख आहे उलट. येनकेनप्रकारेण आमचंच सरकार आहे.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन 58 विधायकों  में से एक की हत्या की गई उसी दिन, दिनदहाड़े.</p>



<p class="has-text-align-left wp-block-paragraph"><strong>IB ने गृहमंत्रालय को संदेश भेजा, &#8220;उनकी ताकद को रोकना अभीभी नामुमकिन लग रहा है. केशव की गिरफ्तारी से उनके सर पर खून सवार हो गया है. मंत्री जी का व्यक्तिगत रूप से देखना जरूरी है.&#8221;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><cite><strong>To be continued&#8230;..</strong></cite></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Warm Regards,</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>Dnyanesh Make &#8220;The DPM&#8221;</strong></em></p>



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<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/28/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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