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	<title>Political Fiction Archives - Words Of DPM</title>
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	<title>Political Fiction Archives - Words Of DPM</title>
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		<title>नाक के नीचे से: भाग 2</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dpm@admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jul 2020 05:39:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
		<category><![CDATA[detective-story]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Story]]></category>
		<category><![CDATA[Political Fiction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे.</p>
<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/29/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/">नाक के नीचे से: भाग 2</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a></p>



<p><a href="https://wordsofdpm.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नाक के नीचे से – अंतिम भाग!</a></p>



<hr class="wp-block-separator has-text-color has-background has-black-background-color has-black-color is-style-wide"/>



<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह के छह बजे बिना चाय पानी पिये भी क्या मुलाकात करनी थी कि गृह सचिव इतनी जल्दी में थे? बात ही ऐसी थी. दरअसल तिवारी जी खुद मराठी थे. मुम्बई में पले बढ़े, IAS बने और देश की सेवा में गृह सचिव के पद तक पहुंच गए. IB की तरफ से गृह मंत्रालय को खबर मिली थी कि शहरों में छुपे हुए माओवादी बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र के बीस बड़े शहरों में दंगे कराने वाले है. इसमें महाराष्ट्र सरकार के लोग भी शामिल है और प्रदेश के बड़े राष्ट्रीय नेता जाधव साहब का सीधे तौर पर IB की तरफ से नाम आया था. महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय से इस बात का कोई जिक्र तक नहीं हुआ था. तिवारी जी अपनी तरफ से जायजा लेने खुद पहुंचे थे, गृहमंत्री जी को बोलने से पहले. तिवारी जी इसीलिए नहीं चाहते थे कि मुख्यमंत्री जी से हुई उनकी कोई भी मुलाकात मीडिया को पता चले. वो मंत्रालय से छुट्टी लेकर घर जाने के नाम से निकले थे. बिना अपॉइंटमेंट के सीएम साहब से मिलना उनके लिए कोई खास मुश्किल काम नहीं था. बहरहाल सरकार बचाने के चक्कर मे मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को बाहर नहीं आने दिया. एक चाल तो तिवारीजी बखूबी चल गए. भला पाटिल साहब राजनीति के कच्चे हो लेकिन किसी पदासीन मुख्यमंत्री को इतनी चतुराई से गुमराह करना बड़े बड़े राजनेताओं को न आता हो, लेकिन इस अधिकारी ने कर दिखाया.</p>



<p>लेकिन क्या सरकार गिरने से खतरा टला था? जाधव साहब की पार्टी के विधायक की हत्या हुई थी. संकट अभी बढा था.</p>



<p>और इस तरफ जाधव साहब की चिंताएं भी. क्या जाधव साहब सच मे माओवादियोंसे मिले थे..? देखेंगे&#8230;.</p>



<p>राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वालजी को केंद्रीय गृहमंत्रीने तुरंत बैठक में बुलाया. जैस्वाल जी और तिवारी जी इकट्ठा मतलब जेम्स बॉन्ड और शेरलॉक होम्स की जोड़ी. और उस मीटिंग में माओवादियों की सारी हरकतों का किस तरह पर्दाफाश किया गया इसका रिपोर्ट दोनों ने दिया.</p>



<p>IB अपनी तरफ से देश के दुश्मनों पर कड़ी निगाह बनाये रखता है. लेकिन कुछ बातें उनकी पकड़ में नहीं आ सकती थी. फिर भी संभाव्य माओवादी आक्रमण का अंदाजा उन्हें आया था. हमला किस प्रकार होनेवाला था इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल था.</p>



<p>तिवारीजी जिस दिन दिल्ली से निकलने वाले थे तो जान बूझ कर सीधे रास्ते मुम्बई नहीं आये. ये खबर तो माओवादियो को लग गई थी और वो अपना प्लान रद्द करनेवाले थे, क्योंकि पकड़े जाते. लेकिन तिवारीजी लखनऊ गए और उस वक़्त ऐसा दिखाया गया कि यूपी के गृहमंत्री से उनका काम चल रहा है. दंगे भी उस रात उन्होंने खुद लगाए थे जिसके चलते माओवादियों को भरोसा हो जाये कि केंद्रीय गृह सचिव महाराष्ट्र नहीं आएंगे. उन दंगो में जान का कोई नुकसान नहीं हुआ ये आश्चर्य नहीं था. आधी रात को स्पेशल फ्लाइट लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सुबह मिल लिए और इसकी कानोकान खबर नहीं लगी किसीको, क्योंकि बेट ही लगी थी महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर. अगर सरकार बचती तो साथी दल के जो नेता उस वक्त गृहमंत्री थे उनको निकाल के तिवारीजी आएंगे ऐसा मुख्यमंत्री जी से तय किया गया. यही पे तिवारीजी का सबसे बड़ा दाँव था. दरअसल महाराष्ट्र सरकार का साथी दल और राज्य के गृहमंत्री शामिल थे. उनको बिना अंदाजा लगाए उनपे नजर रखनी थी.</p>



<p>इस नाटक के दूसरे छोर पर पर्दा लिए बैठे थे राज्य के विपक्ष नेता और केंद्र सरकार के पक्ष से देशपांडे जी, जो राज्य के पूर्वी गृहमंत्री रहे थे और महाराष्ट्र के माओवादी नेटवर्क को अच्छी तरह से पहचानते थे. उनकी दूसरी खासियत ये थी के सभी दलों के सभी बड़े नेता और लगभग हर विधायक से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे. 58 बागी विधायक तोड़ना कोई बड़ी बात नहीं थी. सरकार गिरना तो इस प्लैनिंग में बड़ी ही आम प्रक्रिया रही.</p>



<p>सरकार गिरने के सोलहवे दिन माओवादीयों को पालनेवाले समाजसेवी संगठन किस तरह पकड़े गए ये नहीं समझा? चलिए समझाते है. उन 58 बागी विधायकों को दिल्ली से 32 किमी दूर एक रिसॉर्ट में रखा था. उनमे से एक था वाटवे. इस वाटवे का पकड़े गए चंदू केशव से जीजा-साले का रिश्ता था. भलेही वाटवे खुद उसमें शामिल न हो पर वो चंदू की हरकतों से वाकिफ था. रहीम कला मंच तो राडार पर था ही, चंदू के रिश्तेदार को इस कदर दबोच लिया गया कि न सिर्फ चंदू, उसने रहीम कला मंच समेत महाराष्ट्र के कई माओवादी संघठनों के पते खोलकर रख दिये.</p>



<p>लेकिन सुरक्षित रिसोर्ट में घुसके विधायक वाटवे की हत्या करवा दी उन्ही माओवादियोंने..!</p>



<p>उस शाम स्पेशल मीटिंग के तहत तिवारीजी दिल्ली के मुख्यमंत्री अग्रवाल जी से मिले. उनसे मिलते ही इस सारे षडयंत्र का आगा पीछा जान गए तिवारी जी.</p>



<p>शाम को गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ हाई लेवल मीटिंग में कुछ यूं रिपोर्ट किया तिवारीजी ने.</p>



<p>&#8220;देश के कई IAS और IPS दर्जे के अफसर पिछले 25 सालों से माओवाद की जड़ों को ब्यूरोक्रेसी के अंदर मजबूत करने लगे है. घोटालों की सरकार को गिराने के आंदोलनों में दो महत्वपूर्ण ताकतों का योगदान रहा. एक थी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और दूसरी माओवादी विचारधारा. जहाँ एक ओर राष्ट्रवादी सेवा संघठन की लगभग सौ साल पुरानी ताकत अपने सपने को साकार करते हुए सत्ता में आ गयी, उसी वक्त इसी लहर पे चढ़ कर माओवाद की नौका ब्यूरोक्रेसी से चलकर राजनीति में आ गई. अब तक न्यूज मीडिया, प्रोफेसरों, साहित्यिकों एवं समाजसेवकों में ऊंचे पायदान तक पहुंचे हुए माओवादी अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन गए है. ये किसी मायावी राक्षस से कम नहीं है. ब्यूरोक्रेटिक माओवादियों के मसीहा को अगर सलाखें दिखाई जाएं तो सालभर के अंदर अंदर ये कीचड़ साफ कर देंगे..&#8221;</p>



<p>&#8220;बिना कीचड़ के कमल कैसे खिलेगा?&#8221; गृहमंत्री जी ने कहा</p>



<p>&#8220;मंत्री जी आप कहना क्या चाहते है?&#8221; तिवारी जी ने पूछा</p>



<p>प्रधानमंत्रीजी बोले, &#8220;देखो तिवारी, हम उस संघठन में 20 साल तक रहें है जिसकी जान पर ये माओवादी आफत बने है. क्या लगता है प्रधानमंत्री बनतेही इनको खत्म करना हमें न आता? बल का प्रयोग अगर हम करेंगे तो समझ लेना उनके मकसद में हमने हाथ बटा लिया. वो चोरी छिपे इतना कर सकते है तो क्या हम छुपकर ही उनके मकसद नहीं तोड़ सकते? अग्रवाल जी कल मिलने आएंगे. उनका बिभीषन हम छीन लेंगे तो देखते है कैसे टिकते है हमारे सामने. आप अपना काम करते रहिए मगर गांधीजी को न भूलिए. और हां, विधायक की हत्या में उनका कोई हाथ नही है!&#8221;</p>



<p><strong>अब तक जिस शेरलॉक वाले दिमाग से चल रहे थे तिवारी जी,चाणक्य नीति सामने आते ही अचरज में आ गए. मीटिंग के बाद वो जैस्वाल जी से मिले. जैस्वाल जी ने आनेवाले प्लान के बारें में उन्हें समझाया. सुनकर तिवारीजी बस इतना बोले, &#8220;तो अभी तक जो कार्रवाइयाँ हुई उनका मकसद सिर्फ जाधव साहब को डराना था? और अगर माओवादी कल चलकर दंगे भड़काएँ तो?&#8221;</strong></p>



<p><strong><em>&#8220;तो फिर भगवान जाने क्या होगा उनका&#8230;लेकिन फिलहाल के लिए वो ये बेवकूफी वो नहीं करेंगे&#8230;&#8221; जैस्वाल जी ने कहा&#8230;</em></strong></p>



<p><strong>To be continued&#8230;.</strong></p>



<p><em><strong>Warm Regards,</strong></em></p>



<p><em><strong>Dnyanesh Make &#8220;The DPM&#8221;</strong></em></p>



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</div>



<p></p>
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		<title>नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dpm@admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2020 10:11:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
		<category><![CDATA[detective-story]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Story]]></category>
		<category><![CDATA[Political Fiction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था.</p>
<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/28/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>खराब मौसम के चलते जहाज का उड़ान भरना मुश्किल लग रहा था. तिवारी साहब ने रास्ते से जाने का फैसला लिया.</p>



<p>तिवारी साहब केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव थे. देश की अंदरूनी सुरक्षा की और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का बड़ा बोझ वो बखूबी निभाना जानते थे. देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैस्वाल जी के काफी करीबी दोस्त माने जाते थे. आज उन्हें एक बेहद जरूरी सिलसिले के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलना था. दिल्ली से अपनी चार्टर्ड फ्लाइट से निकलकर दो घंटे में आने का नियोजन असफल रहा, बाकायदा अभी दस घंटे में पहुंचना था. बारिश के कारण वो भी असंभव सा लग रहा था.</p>



<p>यूपी के गृह मंत्रालयसे बात करके लखनऊ से मुम्बई चार्टर्ड   फ्लाइट का इंतजाम कराया गया. रात के साढेआठ बजे तिवारी साहब दिल्ली से लखनऊ गाड़ी से रवाना हुए.</p>



<p>लखनऊ में उस रात अचानकसे हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क गए. कुछ कारनामों की बू आने लगी. यूपी राज्य के गृहमंत्री ने तिवारी जी को आश्वासन दिया कि वो अपने लेवल पे सब संभाल लेंगे और तिवारी साहब निश्चिंत होकर मुम्बई के लिए रवाना हो दिए. </p>



<p>पहुंचते ही उन्होंने मुख्यमंत्री जी से उनके घर जाकर बात की वो भी सुबह छह बजे. तिवारी जी ने उनको बताया कि महाराष्ट्र में सरकार गिरने वाली है. सत्तापक्ष के कईं विधायक विपक्ष, जो कि केंद्र में सत्तापक्ष था, उनके सीधे संपर्क में थे. अब क्योंकि महाराष्ट्र में गठजोड़ की सरकार थी तो मुख्यमंत्री जी परेशान तो हुए. उन्होंने तिवारी जी से पूछा कि आप हमपे इतने मेहरबान क्यों हो रहे हो. तिवारी जी ने सरलता से जवाब दिया, &#8220;पाटील सर मी मराठी आहे. माझ्या कारकिर्दीत सोळा वर्षात सहा मुख्यमंत्री पाहिलेत मी, पण सत्तेत असताना किंगमेकर आणि नसताना सत्ताधाऱ्यांचा कर्दनकाळ अशी आपल्या वडिलांची ख्याती होती. सरकार पडण्यापासून तर वाचवणारच आणि मोबदला घ्यायला सुद्धा येणारच. सध्या राज्याचे गृहमंत्री आहेत त्यांना राहुद्या काही काळ, माझ्यासारखा अनुभवी माणूस तुम्हाला येत्या काळात गरजेचा आहे. गृहमंत्रीपद हा आमचा मोबदला.&#8221;</p>



<p>ठीक वैसा ही हुआ. महाराष्ट्र के सत्तापक्ष के कुल 58 विधायक केंद्रीय सत्तापक्ष के हाथ लग गए. सरकार अल्पमत में आ गई. अब मुख्यमंत्री पाटिल का पूरा भरोसा तिवारी साहब के ऊपर था. तिवारी साहब उन सारे विधायकों को वापस भेजने का प्रबंध करनेवाले थे. तिवारी साहब ने बड़ा धोखा दे दिया. सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन शुरू हो गया. केन्द्रिय सत्तापक्ष सत्ता स्थापना की कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था. बहरहाल उनका यही खामोश संयम महाराष्ट्र सत्तापक्ष के भागीदार जाधव साहब का सिरदर्द बन गया. राष्ट्रपति शासन के चलते उनके आनेवाले मनसूबो पर पानी फिर गया था. 15 दिन ऐसेही गए.</p>



<p>सोलहवे दिन अचानक खबर आई. IB के राडार पर रहनेवाली तमाम संस्थाएं देशभर में बंद कराने के सरकारी ऐलान हुए. पुणे का रहीम कला मंच भी इसमें शामिल था. IB के मुताबिक ये सारी संस्थाएं समाजसेवा की आड़ में देश के दुश्मनों के हाथ मजबूत किया करती थी. भारत के अंदर बहुत बड़े गृहयुद्ध की तैयारी में लगी हुई थी. रहीम कला मंच के सबसे बड़े कथित कलाकार एवं कथित समाजसेवी चंदू केशव को गिरफ्तार किया गया. जाधव साहब की चिंताएं और बढ़ी. ये वहीं चंदू केशव था जो समाजसेवा की आड़ में जाधव साहब का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार भी करता था जिसके बदले उसे बहुत सारा काला पैसा मिलता था. चंदू केशव पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लग गया. अगर कड़ी खुलती तो यही कानून जाधव साहब पर भी लगनेकी आशंका थी.</p>



<p>उस शाम जाधव साहब को फोन आया, केंद्रीय सत्तापक्ष एवं राज्य विपक्ष के एक युवा नेता, देशपांडे साहब, जो पिछली सरकार के गृहमंत्री रह चुके थे उनका. </p>



<p>&#8220;जाधव साहेब अपरिपक्व नेत्यांसोबत सत्तास्थापणेचा हाच एक तोटा असतो, माघारी अशी एखादी चूक करू शकतात ज्याची भरपाई करणं जड होऊन बसतं. साहेब अजून पण संधी आहे, ज्यांना कुत्रे समजून प्रचाराला ठेवलात ते लांडगे आहेत, एक दिवस तुमच्याही बकऱ्या खायला कमी करणार नाही. आमच्या हवाली करा त्यांना आणि केंद्रात मंत्रिपद घेऊन राज्यात आमच्यासोबत या. तुमच्यावर फार कमी वेळा विश्वास टाकला जाऊ शकतो. नाहीतर मला पर्वा नाही साहेब राष्ट्रपती राजवटीत सुख आहे उलट. येनकेनप्रकारेण आमचंच सरकार आहे.&#8221;</p>



<p>उन 58 विधायकों  में से एक की हत्या की गई उसी दिन, दिनदहाड़े.</p>



<p class="has-text-align-left"><strong>IB ने गृहमंत्रालय को संदेश भेजा, &#8220;उनकी ताकद को रोकना अभीभी नामुमकिन लग रहा है. केशव की गिरफ्तारी से उनके सर पर खून सवार हो गया है. मंत्री जी का व्यक्तिगत रूप से देखना जरूरी है.&#8221;</strong></p>



<p><cite><strong>To be continued&#8230;..</strong></cite></p>



<p><em><strong>Warm Regards,</strong></em></p>



<p><em><strong>Dnyanesh Make &#8220;The DPM&#8221;</strong></em></p>



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<p>The post <a href="https://wordsofdpm.com/home/2020/07/28/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/">नाक के नीचे से &#8211; भाग 1</a> appeared first on <a href="https://wordsofdpm.com/home">Words Of DPM</a>.</p>
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